खरतरगच्छ संघ जयपुर
इतिहास
भावना” नामक पत्राकार ग्रन्थ में सन् १८७६ (वि. सं. १९३३) में बनारस से प्रकाशित हुआ था। इस रास में बालूचर निवासी ‘दूगड गोत्रीय राय प्रतापसिंह बहादुर का वर्णन है। ये राय प्रतापसिंह बहादुर राय लखमीपतसिंह दूगड़ और धनपतसिंह दुगड के पिता थे। राय प्रतापसिंह ने बालूचर (बंगाल) से सिद्धाचल तीर्थं का यात्री संघ निकाला था। सिद्धाचल की यात्रा कर वापस लौटते हुए इस संघ ने जयपुर के मोहन बाग में उतारा / डेरा किया था। इसी मोहन बाग (मोहन बाडी) में अठाइ महोच्छव के साथ बावन जिनालय का उत्सव/ पूजन किया था और यहीं संघ के समक्ष संघपति-माला पहनी थी । स्वधर्मी वात्सल्य आदि के द्वारा जयपुर निवासियों को संतुष्ट किया था। जयपुर में कीर्ति बढ़ी थी। वहाँ से संघ ने अपने देश की ओर प्रयाण किया था।
इम करी आव्या हो राज, जयपुर नगरे हो लाल ।
आवीनें उतारो रे, कीधो बाग मनोहरु ॥ ४ ॥
आठ दिवसनो हो राज, महोछव, अठाई हो लाल ।
मोहन बागे रे बावन जिन उच्छव करें ।। ५ ।।
उच्छब करीने हो राज, संघ समक्षे हो लाल ।
बहू द्रव्य आपी रे, माला निज कंठे ठवी ॥ ६ ॥
ज्ञात नॅ पोखें हो राज, सजन संतोषे हो लाल ।
नित प्रति आपे रे, भोजन विविध प्रकारना ॥ ७ ॥
कीरत वाधी हो राज, जयपुर नगरे हो लाल ।
कूच करीने रे, चाल्या निज आवासनें ॥ ८ ॥
इसमें अंकित “जयपुर नगर, मोहन बाग और बावन जिन ओच्छव” शब्द महत्त्वपूर्ण हैं। मोहनबाग मोहनबाड़ी ही है ।
“बावन जिन” नन्दीश्वर द्वीप रचना की ओर संकेत करते हैं। इससे यह स्पष्टत सिद्ध है कि सं० १९१६ से पूर्व मोहनवाडी मैं नन्दीश्वर द्वीप की रचना हो चुकी थी।
यह लिखते हुए हार्दिक दुःख है कि मोहनवाडी में इस मंडप की रचना का आज नाम शेष भी नहीं रहा है।
नन्दीश्वर द्वीप के पूजन के काव्य एवं मन्त्र और पूजा की यह एक मात्र कृति है और इसी के आधार से यहां जा पढ़ाई जाती है । अतः प्रारंभ में ५२ जिनालयों की स्थापना के पश्चात् पूजन के काव्य एवं मन्त्र दिये जा रहे हैं और तत्पश्चात् नन्दीश्वर द्वीप की अष्टप्रकारी पूजा दी जा रही है।
साधु-साध्वी

परम पूज्य खरतर गच्छाधिपति, अवन्ति तीर्थ उद्धारक, शासन प्रभावक आचार्य श्री जिनमणिप्रभ सूरीश्वर जी म. सा.

खरतरगच्छाचार्य प. पू. शासन प्रभावक श्री जिन पीयूषसागर सूरीश्वर जी म. सा.

हृदयस्पर्शी व्याख्यान दात्री, गुरु विचक्षण की यशस्वी जैन साध्वी मरुधर ज्योति परम पूज्या मणिप्रभा श्री जी म. सा.
कार्यकारिणी

श्री प्रकाश चन्द जी लोढ़ा
अध्यक्ष

श्री कमलचन्द जी सुराणा
वरिष्ठ उपाध्यक्ष

श्री अनूप कुमार जी पारख
उपाध्यक्ष

श्री देवेन्द्र कुमार जी मालू
संघ मंत्री

श्री अनिल जी वैद
सह मंत्री

श्री बिरदीमल जी दासोत
कोषाध्यक्ष

श्री गिरधारी लाल जी टांक
भण्डारक

श्री मोहनलाल जी डागा
मंत्री-भोजनशालायें

श्री विनयचन्द जी घाधिया
मंत्री मन्दिर दादाबाड़ी

श्री सुशील कुमार जी मूसल
सांस्कृतिक मंत्री

श्रीमती अमीता जी भण्डारी
मंत्री- महिला विभाग

श्री अशोक कुमार जी डागा
मंत्री-वर्तन विभाग एवं व्यवस्थापक- शिवजीराम भवन भोजनशाला
व्यवस्थापक

श्री विश्वास जी गोठी

श्री विमलचन्द जी भण्डारी
सांगानेर मन्दिर

श्री पारसचन्द जी डागा
सांगानेर दादाबाड़ी

श्री अशोक कुमार जी बुरड
मोहनबाड़ी मन्दिर, दादाबाड़ी व उपासरा

श्री सुशील जी बुरड़
मोहनबाड़ी अरिहन्त वाटिका व धर्मशाला

श्री पदमचन्द जी पुंगलिया
बडा मन्दिर, कुशल भवन, लीलाधर जी का उपासरा

श्री प्रकाशचन्द जी कोठारी
मालपुरा संयोजक

श्री मिश्रीमल जी बोहरा
मालपुरा आवास

श्री राजकुमार जी बेगानी
मालपुरा मंदिर दादाबाड़ी

श्री ललित जी हुण्डिया
मालपुरा भोजनशालाग

श्री नवनीत (मोन्टू) जी श्री श्रीमाल
श्री विषक्षण स्मृति भवन (यात्री निवास)

श्री राजेश जी नाहटा
आमेर मन्दिर व दादाबाड़ी

श्री जितेन्द्र जी पारख
मानसरोवर मन्दिर, पनिया धर्मशाला. युवा परिषद्, खो-मंदिर

श्रीमती रीना जी बंद
विचक्षण भवन, लाइब्रेरी एवं आयम्बिलशाला

श्री राजीव जी भण्डारी
चाकसू मन्दिर दादाबाड़ी एवं वैयावच्च

श्री ज्ञानचन्द जी छाजेड
टोक फाटक मन्दिर, छात्रावास

श्री विनोद जी श्रीमाल
कटला मन्दिर

श्री यशवंत जी गोलेछा
प्रतिष्ठा समिति

श्री प्रकाश चन्द जी लोढ़ा
अध्यक्ष

श्री देवेन्द्र कुमार जी मालू
संघ मंत्री

श्री विमल चंद जी सुराणा
संयोजक

श्री फ़तेह सिंह जी बरडिया
सहसंयोजक

श्री किशन चंद जी डागा
सहसंयोजक

श्री अनूप कुमार जी पारख
सहसंयोजक
मंदिर निर्माण समिति

श्री कुशल चंद जी सुराणा
अध्यक्ष